ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के तहत खाड़ी क्षेत्र का दौरा करने के लिए तैयार हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ आर्थिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है। इस दौरे के जरिए निवेश को बढ़ावा देने और रक्षा व सुरक्षा भागीदारी को गहरा करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे यूएई ब्रिटेन के लिए एक प्रमुख आर्थिक साझेदार के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।
परिप्रेक्ष्य और मुख्य उद्देश्य
इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री स्टार्मर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नहयान से मुलाकात करेंगे, और उसके बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस, मोहम्मद बिन सलमान से चर्चा करेंगे। इन बैठकों के प्रमुख उद्देश्य वाणिज्यिक संबंधों में सुधार, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ एक नए मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता और रक्षा व सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को सशक्त बनाना शामिल है।
आर्थिक और रक्षा प्रभाव
यह यात्रा ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के आर्थिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। दोनों देशों के बीच पहले से ही पर्याप्त व्यापार है, जहां यूएई ब्रिटेन में एक बड़ा निवेशक है। वर्तमान में 23 अरब पाउंड का आकलित यह व्यापार, नए मुक्त व्यापार समझौते से 16% तक बढ़ सकता है, जो सालाना लगभग 8.6 अरब पाउंड तक जोड़ सकता है। इसके अलावा, ब्रिटेन की सऊदी अरब के लिए 3.8 अरब पाउंड की सालाना रक्षा निर्यात भी एक महत्वपूर्ण बिंदु रहेगा।
क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य का सहयोग
आर्थिक और रक्षा संबंधों के अलावा, यह यात्रा क्षेत्रीय स्थिरता पर भी ध्यान देगी, जिसमें इस्राइल और गाजा के बीच जल्द से जल्द युद्धविराम की आवश्यकता, सभी बंधकों की रिहाई और गाजा में मानवीय सहायता की तीव्रता शामिल है। रूस की अवैध वित्तीय गतिविधियों और संगठित अपराध जैसी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिटेन की यूएई और अन्य खाड़ी देशों के साथ सहयोग पर भी चर्चा की जाएगी।
सार में, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा खाड़ी क्षेत्र में ब्रिटेन के आर्थिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे ब्रिटेन उच्च गुणवत्ता वाले विकास पर केंद्रित साझेदारों के एक नेटवर्क को बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है, यह यात्रा दोनों देशों के लिए ठोस लाभ लाने और भविष्य के सहयोग की नींव रखने की दिशा में अपेक्षित है।








